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इतिहास एवं मान्यता

श्री रामप्रकाश संस्कृ त महाविद्यालय, पातेपुर की स्थापना श्री रामजानकी मठ के नवम मठाधीश प्रातःस्मरणीय साकेतवासी अनंत विभूषित स्वामी श्री रामचंद्र दास जी महाराज द्वारा अपने पूज्य गुरुदेव अनंत विभूषित स्वामी श्री रामप्रकाश दास जी महाराज की पावन स्मृति में दिनांक 19 जुलाई 1933 ई० को की गई।

अनंत विभूषित स्वामी श्री रामचंद्र दास जी महाराज विरक्त, दूरदर्शी तथा शिक्षा-निष्ठ संत थे। मठाधीश पद ग्रहण करते ही उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म तथा शिक्षा के संवधर्न का संकल्प लिया। उसी संकल्प के फलस्वरूप उन्होंने मठ पिरसर में इस महाविद्यालय की नींव रखी। संस्कृत भाषा, प्राच्य शास्त्रों एवं सनातन धर्म के अध्ययन-अध्यापन हेतु विशेष प्रावधान किए गए। साथ ही विद्यार्थियों के लिए भोजन, जलपान तथा आवास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चत की गई, जिससे छात्रगण गुरु-सानिध्य में निःशंक होकर शिक्षा-ग्रहण कर सकें।

इस संस्थान की औपचारिक शैक्षिक यात्रा 1934 ई० में विहारोत्कल संस्कृ त सिमित, पटना की परीक्षा प्रणाली से प्रारम्भ हुई। 22 दिसम्बर 1934 को
बिहार एवं उड़ीसा के अधीक्षक (Superintendent) के प्रितवेदन में इस महाविद्यालय की शिक्षा-व्यवस्था की विशेष प्रशंसा की गई।

आगे चलकर बिहार संस्कृत एसोसिएशन, पटना के पत्रांक सं. 2573-74/3 ए-2, दिनांक 13 दिसम्बर 1942 के अनुसार छात्रसंख्या एवं अध्यापन- गुणवत्ता के आधार पर इस संस्था को क्रमशः
- व्याकरण, न्याय एवं साहित्य में आचार्य स्तर
- वेदांत में शास्त्री स्तर
- सांख्य-योग में मध्यमा स्तर
तक मान्यता प्राप्त हुई। निरंतर प्रयासों एवं उन्नयन के फलस्वरूप यह संस्थान महाविद्यालय के रूप में विकिसत हुआ तथा राज्य सरकार द्वारा शास्त्री स्तर के महाविद्यालय के रूप में औपचारिक मान्यता प्राप्त की।

मंदिर श्री राम जानकी मठ

मंदिर श्री राम जानकी मठ