श्री रामप्रकाश संस्कृ त महाविद्यालय, पातेपुर की स्थापना श्री रामजानकी मठ के नवम मठाधीश प्रातःस्मरणीय साकेतवासी अनंत विभूषित स्वामी श्री रामचंद्र दास जी महाराज द्वारा अपने पूज्य गुरुदेव अनंत विभूषित स्वामी श्री रामप्रकाश दास जी महाराज की पावन स्मृति में दिनांक 19 जुलाई 1933 ई० को की गई।
अनंत विभूषित स्वामी श्री रामचंद्र दास जी महाराज विरक्त, दूरदर्शी तथा शिक्षा-निष्ठ संत थे। मठाधीश पद ग्रहण करते ही उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म तथा शिक्षा के संवधर्न का संकल्प लिया। उसी संकल्प के फलस्वरूप उन्होंने मठ पिरसर में इस महाविद्यालय की नींव रखी। संस्कृत भाषा, प्राच्य शास्त्रों एवं सनातन धर्म के अध्ययन-अध्यापन हेतु विशेष प्रावधान किए गए। साथ ही विद्यार्थियों के लिए भोजन, जलपान तथा आवास की समुचित व्यवस्था सुनिश्चत की गई, जिससे छात्रगण गुरु-सानिध्य में निःशंक होकर शिक्षा-ग्रहण कर सकें।
महाविद्यालय में वतर्मान समय में अध्यापन एवं प्रशासिनक कार्यों के लिए कुल 13 प्रकोष्ठ विद्यमान हैं। यहाँ का पुस्तकालय समृद्ध, अद्वितीय एवं प्राच्य विषयों का अनुपम भंडार है। अपनी गौरवशाली परंपरा एवं शैक्षिणक उत्कृष्टता के कारण यह महाविद्यालय राज्य स्तर पर विशिष्ट स्थान रखता है।
वतर्मान में महामंडलेश्वर बाबा विश्वमोहन दास जी के कर-कमलों की छत्रछाया एवं मागर्दशर्न में यह महाविद्यालय निरंतर उन्नति के पथ पर अग्रसर है और भारतीय संस्कृ ति तथा संस्कृ त शिक्षा के संवधर्न में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निवर्हन कर रहा है।